जमीन खरीदने से पहले जान लें ये जरूरी बदलाव 2026 से लागू हुए नए नियम Land Registry New Rules

Land Registry New Rules भारत में जमीन और संपत्ति से जुड़े विवाद लंबे समय से एक बड़ी समस्या रहे हैं। फर्जी दस्तावेज, गलत नामांतरण और अधूरे रिकॉर्ड के कारण लोगों को सालों तक कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं को खत्म करने के लिए सरकार ने 2026 से जमीन रजिस्ट्री के नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य भूमि लेनदेन को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है।

डिजिटल सिस्टम पर आधारित नई व्यवस्था

नए नियमों में जमीन रजिस्ट्री को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। अब रजिस्ट्री से जुड़े ज्यादातर काम ऑनलाइन किए जा सकेंगे। दस्तावेज अपलोड करना, अपॉइंटमेंट लेना और शुल्क का भुगतान एक ही प्लेटफॉर्म पर संभव होगा। इससे लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और समय की भी बचत होगी।

डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित सर्वर पर रखे जाएंगे, जिससे दस्तावेज गुम होने या उनमें छेड़छाड़ की संभावना बहुत कम हो जाएगी।

पहचान सत्यापन हुआ अनिवार्य

2026 से जमीन रजिस्ट्री के समय आधार कार्ड और पैन कार्ड अनिवार्य कर दिए गए हैं। इसके साथ ही खरीदार और विक्रेता दोनों का बायोमेट्रिक सत्यापन भी किया जाएगा।

इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जमीन का सौदा सही और असली लोगों के बीच ही हो। पहले फर्जी नामों से रजिस्ट्री के कई मामले सामने आते थे, लेकिन अब डिजिटल पहचान से धोखाधड़ी करना मुश्किल हो जाएगा।

भूमि दस्तावेजों की सख्त जांच

नए नियमों के तहत जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच पहले से कहीं ज्यादा सख्त कर दी गई है। इसमें खसरा नंबर, खतौनी, भू-नक्शा, स्वामित्व प्रमाण पत्र और पुराने रजिस्ट्री रिकॉर्ड का डिजिटल मिलान किया जाएगा।

डिजिटल जांच से यह तुरंत पता चल जाएगा कि जमीन पर कोई विवाद, दावा या कानूनी रोक तो नहीं है। अगर रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी होगी, तो रजिस्ट्री की अनुमति नहीं मिलेगी।

टैक्स बकाया होने पर रजिस्ट्री नहीं

अब अगर किसी जमीन या संपत्ति पर नगर निगम, पंचायत या अन्य स्थानीय टैक्स बकाया है, तो उसकी रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। पहले सभी बकाया टैक्स का भुगतान करना जरूरी होगा।

यह नियम खासतौर पर खरीदारों के लिए फायदेमंद है, क्योंकि इससे भविष्य में टैक्स से जुड़े विवादों से बचा जा सकेगा।

ऑनलाइन सत्यापन से घटेंगे कानूनी विवाद

डिजिटल सिस्टम के जरिए यह भी जांच की जाएगी कि जमीन पर कोई बैंक लोन, बंधक या कोर्ट केस तो नहीं चल रहा है। इससे पहले ही स्थिति साफ हो जाएगी और बाद में विवाद की संभावना कम हो जाएगी।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों से आने वाले समय में अदालतों में जमीन से जुड़े मामलों में कमी आएगी।

खरीदार और विक्रेता दोनों को फायदा

नए नियमों से खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा, क्योंकि उन्हें यह विश्वास मिलेगा कि संपत्ति पूरी तरह वैध है। वहीं विक्रेताओं के लिए भी प्रक्रिया आसान हो गई है, क्योंकि ऑनलाइन सिस्टम से रजिस्ट्री जल्दी और बिना परेशानी पूरी हो सकती है।

राज्यवार नियमों में हो सकता है अंतर

यह ध्यान रखना जरूरी है कि जमीन राज्य सूची का विषय है। इसलिए हर राज्य में नियमों और प्रक्रिया में थोड़ा अंतर हो सकता है। जमीन खरीदने या बेचने से पहले अपने राज्य के राजस्व विभाग से सही जानकारी जरूर लें।

2026 से लागू जमीन रजिस्ट्री के नए नियम आम लोगों के हित में हैं। डिजिटल रिकॉर्ड, सख्त जांच और पहचान सत्यापन से जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी। सही दस्तावेज और पूरी जानकारी के साथ किया गया सौदा ही सुरक्षित निवेश की गारंटी है

Leave a Comment